मैं पथ हूँ, मेरा ह्रदय छलनी मत करो
मैं रोता हूँ, तुम देखने की कोशिश करो
क्या गुनाह किया मैंने जो दर्द देते हो
मैं सबका हूँ , मेरा इम्तेहान लेना बंद करो
मत समझो मुझे अकेला, मेरा खुदा है
मैं देवता हूँ मुझे पूजने की कोशिश करो
मैं पथ हूँ
Related Posts
अजय कीर्ति छद्म रचनाएँ – 6
अल्फ़ाज़ तो महज़ एक हवा का झोंका हैहमने तो बेवक्त भी जग को बदलते देखा है अजय…
ना तेरा कसूर है…ना मेरा कसूर – बृजेश यादव
ये जो मदहोशी सी छायी है, तेरे हुस्न का सब कसूर है। ये जो खोया खोया सा मैं रहता…
युवा का अब आगाज हो
युवा का अब आगाज हो युवा का अब आगाज हो,एक नया अन्दाज़ हो,सिंह की आवाज हो,हर युवा…
उनसे ही रोशन ये दिल है
उनसे ही रोशन ये दिल है मैं रात रात भर रोता हूं,खुद रोते रोते सोता हूं,कोई पूछने…
राम राज्य – कविता अभिनव कुमार
राम राज्य,बजें ढोल नगाड़े,दुर्जन हैँ हारे,हैं राम सहारे । नस नस में राम,बसे हर कण…
चार पंक्तिया
हमने चार पंख्तियाँ क्या लिख दीं लोगों ने कवि बना दिया भरे बजार में हाले-दिल का…
एकांत – कविता
एकांत जाने कैसे लोग रहते हैं भीड़ में,हमें तो तन्हाई पसंद आई है । अकेले बैठ के…
बन जाऊं मैं काश …. जैसे योगी कुमार विश्वास
बन जाऊं मैं काश …. जैसे योगी कुमार विश्वास … बन जाऊं मैं काश,जैसे योगी कुमार…
सुंदरता दिल से होती है
सुंदरता दिल से होती हैदिल सुंदर तो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड भीसुंदर दिखाई देता…
कोरोना में होली – कविता
कैसे खेलें हम ये रंग बिरंगी होलीजब दो गज दूर खड़ी हो हमजोलीलिए गुलाल हम गये छुने…
कलम – (कविता) अभिनव कुमार
कलम ✍🏻 छोटी बहुत ये दिखती है, प्रबल मग़र ये लिखती है,बड़ों बड़ों को…
प्रेम एक स्वछंद धारा
प्रेम एक स्वछंद धारा एक प्रेम भरी दृष्टि और दो मीठे स्नेहिल…
अभिनव कुमार – छद्म रचनाएँ – 12
उत्तम कितने भी हों विचार,सार्थक तभी जब दिखे प्रभाव,झलक दिखे गर आचरण में तो,कथनी…
फ़र्क देखिए (1) बनाम (2) में ज़मीन आसमान का
फ़र्क देखिए (1) बनाम (2) में ज़मीन आसमान का :- (1) "चलो आज मुस्कुराते…
बड़े – कविता
बड़े बरगद के जैसे ये पेड़,रक्षक हैं जैसे कि शेर,तम को करें बिल्कुल ही ढेर,ये…
फिर से लिखने चली हूँ
फिर से शब्द संजोने लगी हूँफिर से पत्र लिखने लगी हूँ इस बार थोडी चिंतित हूँशब्दों…
किंकर्तव्यविमूढ़ – कविता- ईश शाह
जब मैं कुछ नहीं करता हूँतब मुझे दोषी करार दिया जाता है।जब कुछ करूँ तो फिर मेरा…
समय का पहिया
समय का पहिया मानो तो मोती ,अनमोल है समय नहीं तो मिट्टी के मोल है समय कभी पाषाण…
सूरज नये साल का
सूरज नये साल का - क्यों लगता है हमें कि, नये साल के सूरज की पहिली किरण, नई आशा …
अजय कीर्ति छद्म रचनाएँ – 4
इश्क का ऐसे ना इज़हार कर,तेरे नैनों से मुझपे ना वार कर ।मै इश्क का मारा हूं…