तेरे शहर में आने का दिल करता है बार बार

तेरे शहर में आने का दिल करता है बार बार…मैं ढूँढता हूँ बार बार, तुझे देखने के बहाने हजार,  अब तो तुझसे मिलने को, ये निगाहे हैं बेक़रार, तेरे बिना जिंदगी की हर तमन्ना है अधूरी,  अब तुझसे मिलकर मिटानी है ये दूरी…तेरे शहर में आने का दिल करता है बार बार…चाहता हूँ तुम्हे कितना […]

तुम्हारा संदेसा आया

(तुम्हारा संदेसा आया) मेरे गीतों के स्वर तुमसे सजे हैं “प्रिय”दिन-रात कानों  में गूँजें हैं कभी मौन ,कभी पायल  पहन थिरकते  हुए छम-छम  बजे हैं  शब्दों ने भी  क्या माला बनाई नित जुड़ कर एक मूरत बनाई फिर  उसे  प्रेम से हार पहनाया  कानों  में अपना  हाल  सुनाया  प्रकृति भी कितनी उन्मुक्त हुई तुम्हें फाल्गुन बनाकर  बुलायाकभी  मेघों  को भी दूत बनाया गगन […]

स्त्रियां – कविता – वन्दना जैन

स्त्रियांजलप्रपात सी बजती छन-छन उछलती मचलती सरस सी जलधार सहज ,शीतल,सफ़ेद मोतियों का कंठ हार  प्रेम में मधुछन्द सी गूंजती कभी भय लिप्त हो आँखें मूंदती मानसिक उद्वेग को सागर सा समेटती  स्वयं की लिखी अनबुझ पहेली सी व्यक्त होती अव्यक्त सुन्दर लिपि सी भ्रान्ति में जीकर कांति से उद्दीप्त   क्रांति को कांख में दबाए मेघों को दामिनी बन उलाहना देती चमकती-दमकती,फिर छुप जाती  घर्षण से पिघल […]

काश तू कभी मिली ना होती

काश तू कभी मिली ना होती तो अच्छा होता  दोस्तों के बहकावे मे ना आया होता तो अच्छा होता!! तुमने नजाने मुझसे क्यू बड़ाई नजदीकिया, अगर छोड़ना ही था तो ठीक थी ये दूरियाँ! मैंने तो कभी तुझसे प्यार ना किया, तेरे हां कहने से मैंने मैंने इक़रार किया! काश तू कभी मिली ना होती […]

फायदा ही क्या है

बे’वजह ,असमय बोलने मे‌ तेरा फायदा ही क्या है, अपनी कमजोरियों को दिखाने से फायदा ही क्या है ।। सबको मालूम यहां स्वार्थी लोग निवास करने लगे हैं फिर तेरे स्वार्थी या निस्वार्थी बनने‌ से फायदा ही क्या है || अजय माहिया

कुछ शेर ‘उन’ के नाम

कुछ शेर ‘उन’ के नाम लहरों के यूं ही किनारे खुल गएसुना है उनको बागी हमारे मिल गए,ये उफनती हुई लहरें खामोश भी होंगीहमको भी कुछ नए सहारे मिल गए। वो अब नहीं पूछा करते हैं हमें अक्सर अपनी बातों मेंकई मुद्दत के लिखे खत उन्हें हमारे मिल गए।हमने भी फिर उनको फुरसत से परेसां […]

टिप टिप टिप टिप बूंदे

टिप टिप टिप टिप बूंदेटिप टिप टिप टिप बूंदे ये मचा रही हैं शोरमन में कौंधा सा हुआ मेघ घिरे घनघोर। टिप टिप टिप टिप बूंदे ये मचा रही हैं शोरपढ़ा लिखना ताक धर हो गए भाव विभोर। टिप टिप टिप टिप बूंदे ये मचा रही हैं शोरधक धक कर दिल झूमता जैसे नाचे मोर। […]

मंजिल – कविता – ईश शाह

ए मुसाफ़िर थक गया है तो थोड़ा आराम कर ले,फिर उठ और अपनी मंजिल अपने नाम कर ले । इतना मत भागथोड़ा ठहराव कर ले,सब से हो गई हो तोअब खुद से बात कर ले । दिन तो बित ही गयासरगर्मी सी रात कर ले,जो चेहरे पर हंसी रखेउन शब्दों को साथ कर ले । […]

जिंदगी

कभी हास्य बद बनती है जिंदगीकभी शोक ग्रस्त बनती है जिंदगीकभी खेल खेलती है जिंदगीचलते सफर में कुछ याद आयाकभी सोचता हू यू हिसाब मत लेप्यारी मद होश जिंदगी।।

आखिर क्यों पुतिन यूक्रेन चाहते है

यही कारण है कि पुतिन यूक्रेन चाहते हैं: यूक्रेन रैंक यूरेनियम अयस्कों के सिद्ध पुनर्प्राप्ति योग्य भंडार में यूरोप में पहला; टाइटेनियम अयस्क भंडार में यूरोप में दूसरा और दुनिया में 10 वां; मैंगनीज अयस्कों के खोजे गए भंडार में दुनिया में दूसरा (2.3 बिलियन टन, या दुनिया के भंडार का 12%); दुनिया में दूसरा […]

कविता-बचपन

कविता-बचपन कल की ही बात थी वो,जब गुड्डे-गुड्डियों‌ का खेल था ।बस.. वो ही यह दिन था,जिसमे बचपन का मेल था ।। वो आए,तुम गए,तुम आए,वो गए,फिर से सब आए ।काश वो घरौंदे बनाने, बचपन वाले दिन फिर आए ।। वो माँ की गौद मे खेलना ,फिर उठकर भाग जाना ।वो पापा से छूपकर भागना,साथियों […]

तुम्हारा हिस्सा – कहानी शिल्पी प्रसाद

तुम्हारा हिस्सा “सुनो, क्रेडिट कार्ड शायद तुम्हारे वालेट में रह गया।” मां आधे रास्ते पहुंच गई थी। अपने घर वो लोग तकरीबन ४-५ बजे तक पहुंच जाएंगे। मेरे पूछने पर कि और क्या-क्या रह-छूट गया, वो थोड़ी भावुक हो गईं थीं। इतने महीने वो मेरे पास, हमारे साथ रहीं। मां ने उस वक्त मुझे अपना […]

प्रेम है, बसंत हैं।

प्रेम है, बसंत हैं। राह तकती है पंखुड़ियांतितलियों कीजानती है वे बैठ बालियों परपराग निचोड़ उड़ जाएंगीफिर भी जाने क्योंउन्हें आस रहता सदावे आ कर फूलो बढ़ता बोझसोख़ बसंत खिलाएंगी। नीली पाखी चहकते-मटकतेआ बैठी फिर ठूंठ परतिनका दबाए नज़रें बचाएंदो‌ साखो का बीच कहींठहर जाने को एक छत बनाएंठूंठा पेड़ सूखा पड़ा,बेजान हर सावन रहाउन […]

आया वसंत

मन में उमंगतन में तरंगखिल उठे रंगभर भर उमंगआया वसंत !आया वसंत !! सृष्टि मचलखिले पुष्प दलकरवट बदलभर भर उमंगआया वसंत !आया वसंत !! नई राह चुनकोई साध धुनसंधान करभर भर उमंगआया वसंत !आया वसंत !! बँधनो को तोड़ केउलझनों को छोड़ केआरम्भ करनई ले उमंगआया वसंत !आया वसंत !!

किस्से

किस्से,कुछ किताबीकुछ खयाली,पन्नों के बीचठूंठ पत्तियों की तरह,बेजान और अंजान,चेतना केनिचले सतह सेतैरकरमन की शिथिलसतह कोउद्विग्न करतेचले जाते है। किस्से,कुछ किताबीकुछ खयाली।

अभिनव कुमार – छद्म रचनाएँ – 7

जीवन में कुछ करें ऐसे काम,चाहे ना हो अपना नाम,जिनसे हो गुलशन आवाम,देखे अल्लाह, और बस राम l अभिनव कुमार कोई ज़िक्र भी नहीं,कोई फ़िक्र भी नहीं,मेरे जीने-मरने से,कोई फर्क़ भी नहीं l अभिनव कुमार अब तक नहीं इज़हार किया,मैंने कहाँ है ख़ुद से प्यार किया !तू मुझपर क्या करेगा भरोसा,मैंने ख़ुद पे नहीं ऐतबार […]

बेमतलबी बचपन

बेमतलबी बचपन बातें थी,बेमतलब, बेख़ौफ़बेवजह, बकवास। बचपन था,बेसब्र, अल्हड़हैरान-परेशान, मासूम। दोस्ती थी,सुकून, शरारतीबगावती, मनमौजी। सोचती हूं, आज बचा है क्या हैबस, छुटपन की कुछ यादेंआम का पेड़, कैरीगपशप वाला टूटा-जर्जर अड्डा,और भीड़ में गुम,इधर मैं, उधर तुम।

मैं…ख्वाब…और जाम !

मैं…ख्वाब…और जाम ! चाहत की है बात नहींमैंने सब यूं ही छोड़ दियाकैसे तेरे पास रुकूंवेवजह कुछ करना छोड़ दिया जब जब मैं जाता राह अटकमैंने चांद निहारा सुबह तलकसब ख्वाब हैं मेरे चुभन भरेये जानके सबको तोड़ दिया टूटे ख्वाबों को मज़ार बनाहर रोज निहारा करता हूंअपने जख्मों के रंगों काहिसाब लगाया करता हूं […]

मेरा कीमती उपहार

मेरा कीमती उपहार …. हाय ये कैसा भौतिकवादी युग !भोग, लालसा, धन की बस भूख,क्या चाहिए, कुछ पता नहीं,सबकुछ सम्मुख, फ़िर भी दुख । केवल दिखावे की है होड़,दौड़, दौड़, बस अंधी दौड़,रिश्ते ताक रहें हैं मुँह,अपने दिए अब पीछे छोड़ । कुछ ओर ही चाहे मेरा मन,ना वैर द्वेष, ना दोगलापन,धैर्य, विवेक कीमती उपहार,सब्र, […]

अजय कीर्ति छद्म रचनाएँ – 6

अल्फ़ाज़ तो महज़ एक हवा का झोंका हैहमने तो बेवक्त भी जग को बदलते देखा है अजय महिया ये जो ठंडी-सर्द हवाओं की रातें है इन्हें गुज़र तो जाने दे |फिर पता चलेगा तुम्हे ,मेरी मौहाब्बत की कीमत क्या है || अजय महिया निकली हैं आँखे किसी को ढूंढने,लगता है कोई कहीं खो सा गया […]