किताबें बोलती है

किताबें बोलती है सुना है मैने किताबें है बोलती हैंसबको राह दिखाती हैहर एक विषय में बतलाती है,मीठी बाते ताजा खबरें सामान्य ज्ञान बतलाती हैसबको एक ज्ञान बतलाती है ,हिंदी हो या चाहे अंग्रेजी सबको समान रूप में बतलाती है,सुनो जो भैया इनकी तो तुम कलेक्टर साहब बना जाती हैसबसे लोकप्रिय भाषा को भी ये […]

आवाहन :( निर्गुण)

आवाहन 🙁 निर्गुण) ठाढ़ी झरबेरिया वन में होत मिन सार बा  कैसे जाऊँ पार पियरा नदिया के पार बा। भोरी मतवारी तन की अब लगि कुआरि हूँ। सगरौँ सिंगार कइली लागेला उघारि हूँ। वहि पार.. पी. घर… यहि पार संसार बा। कैसे जाऊँ पार! पियरा नदिया के पार बा|| घुप्प अँधियारा बाटइ राह न! सुझाला। […]

शुभम शर्मा ‘शंख्यधार’ – छद्म रचनाए – 1

वो चंद पल बदल बैठे मेरे ईमान का चेहराखड़े थे साथ सब अपने मगर था धुंध का पहराहटा जब वो समा कातिल हुआ दीदार जन्नत काखड़ा था आसमां पर मैं था सर पर जुर्म का पहरा शुभम शर्मा ‘शंख्यधार’ क्यों काली रातों में ही तुम मिलने आते होक्यों फटे हुए लित्ते मेरे तुम सिलने आते […]

“छ: वाणी”

“छ: वाणी” छ: बोले कोई सुनो हमारीभाड़ में जाए दुनिया सारी गोल गोल लोग मुझे घुमातेउल्टा लटकाकर नौ बतातेक्रिकेट में मुझको सिक्स बतातेविक्स एड में मुझे दिखाते। घड़ी है जब भी छ: बजाएदोनों सुइयां सीध पे आएंडूब तब झटपट सूरज जाएकाम छोड़ सब घर को जाएं। साल का जब छटा महीना आताबच्चों को ये खूब […]

मैं नहाया नहीं पिछले रविवार से

मैं नहाया नहीं पिछले रविवार से भिं भिना कर उड़ गई है मक्खी मेरे कान सेहूं नहाया मैं नहीं पिछले रविवार से।है मल्लिचछी पन नहीं मेरे जी और जान मेंवो तो बस यूं ही निकल गए पिछले कुछ दिन  शान में। थी लगाई ये शर्त मैंने अपने यार सेहै नहाना तो सरल पर ना नहाना […]

वो नाराज़ हैं!

वो नाराज़ हैं! मैंने खुद ही खुदको तोड़करअपने रास्ते में कांटे बिछाए हैं,मुझे गिला नहीं है गैरों सेमैंने खुदही खुदसे धोखे खाए हैं। वो देखते हैं तिरछी नजर से मुझे इसमें मेरा क्या कसूर,शायद उन्होंने ऐसे ही हमसे मिलने के गुर अपनाए हैं। अभी लम्हा नहीं गुजरा जब था खुशी से मैंलगता है हमने ही […]

खुशहाली

अपने पन की बगिया है ,खुशहाली का द्वारजीवन भर की पूंजी है ,एक सुखी परिवारखुशहाली वह दीप है यारोंहर कोई जलाना चाहता हैखुशहाली वह रंग है यार्रोंहर कोई रमना चाहता हैखुशहाली वह दौर था यारों कागज़ की नावें होती थींमिट्टी के घरौंदे थे ,छप्पर की दुकानें होती थीकहीं सुनाई देती थी रामायणकहीं रोज अजानें होती […]

घुटनो के दर्द का आयुर्वेदिक घरेलु उपचार

घुटनो के दर्द का आयुर्वेदिक घरेलु उपचार घुटनो के दर्द को लेकर कफी लोग परशान रहते हैं। आजकल लगभाग हर घर में कोई ना कोई है बिमारी से परशान है। आईये जानते है आयुर्वेद और घरेलु तरीके से कैसे लाखो लोगो को घुटने के दर्द में राहत मिली है। रोज़ सुबह खाली पेट आधा चम्मच […]

हमारी भाषा : हिंग्लिश

हमारी भाषा : हिंग्लिश(भाषा पर व्यंग कसती एक लघु कथा) मैं अपने मित्रमंडली में अपनी बात को अन्य मित्रो के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करते हुए कहता हूं कि “आदरणीय महानुभावों, आपसे विनती करते हुए इतना कहता चाहता हूं कि जो आप सबने मिलकर जिस्म२ जैसी खिनौनी चलचित्र को सिनेमा में जाकर देखने का […]

कविता -मै‌ लक्ष्मी दो आँगन की

कविता -मै‌ लक्ष्मी दो आँगन की बेटी बन आई हूं मै जिस‌ आशियाने के आँगन में ।बसेरा होगा कल किसी और घर के आँगन में ।। क्यों चलाई ये रीत,खुदा तेरे इन साहसी बन्दों ने ।आज़ नहीं तो कल पराई कर दी तेरे अदीबों ने ।। जन्म हूआ तब, ना बंटी बधाई उस आंगन में […]

जीवन या कहर

जीवन या कहर ये काली घटा कांटों का महलये जीवन है या कोई कहरटूटा है बनके पहरा यूंजैसे पी लिया हो कोई जहर क्यों मंदम हवा है वहकी सीऔर वीरानगी भी चहेंकी सीपीतल का निकला हर वो महलजिसे सोचा स्वर्ण महल हमने कहीं दूर से आती एक आवाज़जहां दफ़न हैं कई हजारों राजउस घाटी का […]

आसमान के तारे

आसमान के तारे टिमटिमाते हैं रात भर तारे आसमान के,मन को हैं बहलाते वो सारे जहान के,जब देखता हूं मैं उन्हें यही सोचता हरदम,हैं क्यों वहां वो रातभर ऐसे ही खड़े। देखा जो मैंने गौर से कुछ कहने वो लगे,ऐसा लगा जैसे वो हों किसी गोद में पड़े,जलते हुए थे दीप वो एक प्यारा सा […]

राही – अक्षी त्रिवेदी

नूर का लुत्फ़ उठा रहा राही,कहीं उसका आदी न हो जाए,चंचल किरने कर रही सामना,कहीं वक़्त से मुलाक़ात न हों जाए। सत्य की गंगा बहते बहते, कहीं मन का अकस न दिखा जाए,हो रहा कड़वे सच से सामना,कही ज़हन में ज़हर न भर जाए। चाँद को देख मन हो रहा विचलित,कही वो गुमराह न हो […]

युद्ध हो रहा है

युद्ध हो रहा है सूरत-ए-हाल दुनिया का ये क्या हो रहा है लौमड़ भर रहा तिजोरी और जोकर रो रहा है  जंग-ए -वतन में आम आदमी पिस रहा है अहम के सिलबट्टे पर राजा सेना को घिस रहा है  जो था कल तक महापंच सबका वही आज घर-घर जाकर जूते घिस रहा है  किस बात पर तुम अड़े-अड़े से दिख रहे हो चापलूसी […]

रवि – कविता -अक्षी त्रिवेदी

रवि शब्दों से रचा हुआ खेल कभी,कहाँ किसिको समझ में आया हैं,दूर से सब देख रहा वो,पर कभी क्या समझाने आया हैं? मन से विचलित होकर वो भी,कहीं अपनी काया काली न कर जाए,देख रहा है वो तो कलयुग,कहीं इसका दर्शक न बन जाए। डर लग रहा बस इसी बात का,कहीं वो हमसे दूर न […]

कलम – कविता – वंदना जैन

कलमशब्द कम पड़ जाते हैंजब प्रेम उमड़ता है ढेर साराप्रियतम तक पहुचना चाह्ती है कलम दिल के हर जज्बात छोटी-बडी बातेंबातों मे मुलाकातेमुलाकतों मे बरसती बरसातेंदिन के एकाकी लम्हे सांझ की कुम्ह्लायी उदासीरातो मे जागती आखेंसपनों मे मिलन के क्षणसमेट कर अपने अन्दर कलम निकल्ती है शब्दों के समुन्दर मे कश्ती बनकर

भिन्न भिन्न चेहरे 

भिन्न भिन्न चेहरे  अलग-अलग रंग औरअलग-अलग रूप के बहार से नहीं अंदर के ये चेहरे  कोई है डरे सहमे,कोई खिले-खिले से चेहरे माँ जैसे परेशां,पिता जैसे क्रोधितबच्चों से बेफिक्र चेहरे संस्कारों में पले समय से ढले  भाषाओँ से मिले हिंदी को भूले चेहरे  विकृति में रमे संस्कृति से थमेगाँव से निकले शहर में बसे चेहरे  तन से उपस्थित मन में गुमशुदा त्रिशंकु से लटकते बेबस से चेहरे  […]

प्रेम एक स्वछंद धारा

प्रेम एक स्वछंद धारा एक प्रेम भरी दृष्टि और दो मीठे स्नेहिल बोलों  से बना सम्पूर्ण भ्रह्मांड सा प्रेम कैसे समाएगा मिलन और बिछुड़न के छोटे से गांव में जहाँ खड़े रहते हैं अभिलाषाओं और अपेक्षाओं के द्वारपाल जो रात-दिन पहरा देकर वहन करवाते हैं वचन निर्वहन का  ये आज्ञाकारी सिपाही प्रेम के इस गाँव में प्रवेश करते ही अपनी वाणी की तीखी तलवारों,अपेक्षाओं के […]

माँ – कविता – वंदना जैन

“माँ” मैं हूँ हिस्सा तुम्हारा और रहूंगी सदा छाया तुम्हारी  आज दूर हूँ तुमसे पर हर पल मन में है छवि तुम्हारी                   अपनी मुस्कानों की तुमने सदा की मुझ पर स्नेह वर्षा स्वयं को रखा पीछे और आगे रही ढाल तुम्हारी  अपना निवाला छोड़ा मेरे मन को पूरा भरने के लिए, रात-दिन जागी हो मेरे लिए संग रही प्रार्थना तुम्हारी    अपनी खुशियां कम करके […]