भारत में पत्रकारिता का गिरता स्तर

यह बात बिलकुल सत्य है कि एक पत्रकार और उसकी पत्रकारिता अपनी कठिन मेहनत से समाज में घटित हो रही घटना से हमें रूबरू करवाते है. माध्यम बेशक टलीविजन पर दिखाई जाने वाली खबरें हो या आपके हाथों में आने वाला रोज का अखबार और आज तो हमें ज्यादातर विश्वास इंटरनेट पर चलने वाली ख़बरों […]

चार पंक्तिया

हमने चार पंख्तियाँ क्या लिख दीं लोगों ने कवि बना दिया भरे बजार में हाले-दिल का तमाशा बना दिया घर से निकले तो थे कि तुझे भुला देंगे लिख लिख कर दिल से यादों को मिटा देंगे पर आशिकों के इस बाजार ने तेरी यादॊं को हि बाजारू बना दिया बस अब तो यही दुआ […]

बच्पन के दोस्त हुए पुराने

बच्पन के दोस्त हुए पुराने रोज सुबह झूलते हुए स्कूल बस में आंखे मलना दोस्तों के साथ मिलकर क्लास में हुल्लड़ करना शाम को गली क्रिकेट का सिलसिला हुआ अफ़साना बच्पन के दोस्त हुए पुराने…. ….और, E.M.I का चक्कर हुआ चालू A.C. आफ़िस में फ़ाईलों से लड़ना फ़िर बास कि डांट सुनकर बिवी के तानॊ […]

नोटबंदी से भारत की अर्थव्यवस्था पर असर

8 नवंबर २०१६ को भारत के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने काला धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ़ एक अनोखा युद्ध आरंभ करते हुए ५०० और १००० के नोटों को पूरी तरह से रद्ध करने का फ़ैसला सुनाया था. नोटबंदी के इस फ़ैसले के लगभग ५० दिन बाद भी लोगों की तकलीफ़ों में कोई खासा […]

२००० का नोट – “धोखा”, “स्कैम” या “होशियारी”

२००० का नोट – “धोखा”, “स्कैम” या “होशियारी” सरकार ने जो विमुद्रीकरण का कड़ा कदम उठाया है उसकी चारो और प्रशंसा हो रही है । भारत ही नहीं विदेशो में भी इस पर चर्चा हो रही है । कई देश अब इस पर विचार कर रहे है की उन्हें भी इस तरह के कदम उठाने […]

रिलायंस डिफेंस राफाल डील – सच झूठ और प्रोपोगंडा

फ्रेडरिक नीत्शे ने एक बार कहा था “दुनिया में कुछ भी पूर्ण तथ्य नहीं है , केवल व्याख्याएं हैं”। जर्मन दार्शनिक और सांस्कृतिक आलोचक की यह बात वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में एकदम सटीक बैठती है। आजकल अनंत जानकारी एक उंगली के इशारे पर उपलब्ध है और किसी बात को लोगो तक पहुँचना एक क्लिक के […]

धन्यवाद पाकिस्तान ! एक बुद्धिजीवी की कलम से

धन्यवाद पाकिस्तान । साधुवाद । मन कर रहा है तेरे आतंकियों के चरणों को छू लू जैसे की नरेंद्र मोदी ने नवाज़ शरीफ़ की माँ के छुए थे । तूने मुझ पर जो एहसान किया है उससे में जज्बाती हो गया हूँ । अगर फ़िल्मी अंदाज़ में कहूँ तो वह इस प्रकार होगा ” तेरी […]

मुझे मेरे १५ लाख़ दे दो मोदीजी

मुझे मेरे १५ लाख़ दे दो मोदीजी मैं बोखलाया हुआ व्यक्ति हुँ | २०१४ के चुनाव में मैं आपकी पार्टी के खिलाफ था । मैं आपके समर्थको का उपहास करता था । उन्हें भक्त कहकर खूब मजे लेता था । मैं बचपन से ही बुद्धिजीवियों को पढ़ता आया हूँ , सुनता आया हूँ, देखता आया […]

एक विस्मृत क्रांतिकारी शहीद ,उदमी राम

भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन का इतिहासलेखन पर्याप्त शोध, जानकारी की अल्पता की वजह से अनेक क्रांतिकारियों के बलिदान, शौर्य, औेर देशभक्ति को समावेशित नहीं कर पाया या यू कहें कि, उनके त्याग ओैर बलिदान को इतिहास के पन्नों पर पर्याप्त स्थान नहीं दे पाया। एसा ही एक उदाहरण वर्तमान हरियाणा राज्य के सोनीपतजिले के गाॅव लिबासपुर […]

जब भारतीय जनमानस आजादी के सूर्य की पहली किरण के इंतजार में था

जब भारतीय आजादी की इबादत लिखी जा चुकी और तक हों गया था कि, 14-15 अगस्त की आधी रात को भारत नये अध्याय की षुरुआत करेगा औेर एक स्वतंत्र राश्ट्र हो जायेगा तब जनमानस की उत्तेजना, खुषी, जोष,राश्ट्र के प्रति प्रेम, स्वतंत्र राश्ट्र में जीने की उत्सुकता अपने चरम पर थी। षाम से ही लेगों […]

हाॅकी खिलाडी मोहम्मद शाहिद का अवसान

एक बडे खिलाडी का छोटी उम्र में चले जाना एक बहुत बडा खिलाडी और एक बेहतर इंसान बहुत छोटी उम्र में 56 वर्ष में हमें छोडकर चला गया। लीवर की गंभीर बीमारी से ग्रसित शाहिद ने गुरुग्राम के वेदांता अस्पताल में अपने जीवन की आखिरी साॅस ली। 14 अप्रिल 1960 को वाराणसी में जन्में शाहिद […]

निधनः- साहित्यकार महाश्वेता देवी

निधनः- साहित्यकार महाश्वेता देवी

‘‘ खामोश हो गई शोशितो, दलितों औेर आदिवासियों की आवाज’’

बंगला साहित्यकार महाष्वेता देवी अब हमारे बीच में नहीं रही। कलकत्ता के अस्पताल में उन्होने अपने जीवन की अंतिम साॅस ली। इसी के साथ षोशितों, आदिवासियों और दलितों की आवाज खामोष हो गई। उन्होंने अपने लेखन में हमेषा दलितों और षोशितोंकी पीडा उन पर हो रहे अत्याचार को प्रखर आवाज दी।

ध्यान सिंह से ध्यान चंद तक का सफर’

मेजर ध्यान चंद भारतीय हाॅकी का एक एसा नाम जिसका जिसकी तुलना किसी से नहीं की जा सकी। उसने भारतीय हाॅकी को वो सम्मान, गरिमा, अनगिनत जीत, पदक, आदि अत्यन्त कठिन पस्थिितियों में दिलाये जिसके बारे में वर्तमान खेल जगत सोच भी नहीं सकता। अनेक आसरों पर उनके खेल, लगन समर्पण, औेर खेल भावना को […]

पद और गुण की वंदना – णमोकार मंत्र

यह णमोकार नमस्कार महामंत्र जैन धर्म की सभी परमपराओं द्वारा एकमत से मान्य है। ्रप्रायः मानव किसी एक महापुरुश को लक्ष्य बनाकर अपनी समस्त भक्ति व श्रद्धा का स्त्रोत उन पर उडेल देता है, परन्तु इस महामंत्र की विषेशता है कि, इसमें किसी व्यक्तित्व विषेश की नहीं अपितु पद और गुण की वन्दना है। यह […]

सहकारी नेतृत्व की असफलता से हुआ दीर्घ सहकारी सरंचना का अवसान

प्रदेष की दीर्घ कालीन सहकारी साख संरचना का प्रमुख स्तम्भ म.प्र. सहकारी कृशि और ग्रामीण विकास बैंक एवं जिला सहकारी कृशि और ग्रामीण बैंकों का परिसमापन हो गया है। यह परिसमापन कोई साधारण नहीं है कि उसे इतनीर्  आसानी से लिया जा सके। इसने एसे अनेक प्रष्न उपस्थित कर दिये है जिनका उत्तर खोजा ही जाना चाहिये।

क्या मनमोहन असल में “मौन” थे ?

क्या मनमोहन असल में “मौन” थे ?

मशहूर गणितज्ञ पाइथागोरस ने कहा था की इसका खेद मुझे अनेक बार हुआ कि मैं बोल क्यों पड़ा । शायद हमारे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी को इस बात का काफी अच्छा ज्ञान था। और इसलिए उनका तथाकथित मौन उनके चरित्र का हिस्सा नहीं बल्कि एक सोची समझी रणनीति थी।

इस बात को मैंने जानने की कोशिश की कि वे कब और कहाँ बोले एवं कब मौन धारण करके बैठे। यह विचार मेरे मन में तब आया जब पिछले दिनों उन्होंने नरेंद्र मोदी के खिलाफ कहा कि देश में अभिव्यक्ति की आज़ादी का हनन करने वाली हालिया घटनाएं बहुत दुखद हैं और इससे पूरा देश चिंतित है।

बिहार में होगा किसका राज?

क्या मोदी लहर बिहार में काम करेगी? या नितीश मॉडल की जीत होगी? या फिर कोई छुपा रुस्तम बाज़ी मार लेगा ? अपनी राय दे [socialpoll id=”2303164″]

क्या भारत में गौ हत्या पर पाबंदी लगा देनी चाहिए ?

भारत में गाय को पूजा जाता है । वही कुछ लोग गाय के मांस को खाते है । पिछले कुछ समय से यह मुद्दा बहुत ज़ोर पकड़ रहा है की क्या गौ मांस पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगा देना चाहिए या नहीं । आप अपनी राय वोट के ज़रिये बताइये [socialpoll id=”2303159″]

भारत के विकास का रोड़ा नकारात्मक राजनीति

२०१४ के चुनाव ने कई बाते जाहीर कर दी । इसने सबसे बड़ी बात ये साबित कर दी है की अब देश विकास की राह पर चलने को तैयार है । लोगों ने मोदी को वोट दिया हो या मोदी के खिलाफ वोट दिया या फिर वोट ही ना दिया हो पर हर कोई यह देखने को जरूर उत्सुक था की मोदी जिन्होंने विकास के नाम पे चुनाव लड़ा देश का कितना विकास कर पाते है|

समस्याओं के चक्रव्यूह में देश

भारत कलह,अराजकता और समस्याओं का देश है। भारत की दासता के पीछे भी यही कारण थे अन्यथा गोरों में इतनी ताकत नहीं थी जो भारतियों को गुलाम बना लेते। तब भी भारतीय जनता शोषित हो रही थी आज भी भारतीय जनता शोषित हो रही है अन्तर बस इतना सा है कि तब हमें विदेशी रुला […]